
2
हाँ मुझे डर लगता है!
ये कहने में कि मेरा नाम क्या है, या बतलाने में कि मेरा गाँव कौन सा है ।
सुना था कि अजनबियों से बात कर दिल हल्का होता है । शायद इसलिए आप लोगों से ये सब कहने का मेरा दिल चाहता है । ये चाहता है के आज मैं इसे खोल दूँ,बोल दूँ वो राज़ मैंने इसमें बरसों से छिपाए हैं। ना बताए हैं किसी को क्यूँकि इन्हें तो खुद से भी कहने को डर लगता है ।
किसी महान शख्स ने कहा था के,
डर के आगे जीत है !
आज इसे आज़माने का दिल चाहता है। तभी शायद आपसे कहने का, सब राज़ बतलाने का दिल मैंने बनाया है । उम्मीद नहीं करती मैं कि आप समझेंगे मुझे, या मदद कर पाएंगे किसी तरह की, पर इस दिल को आज सब कुछ कहना है। ना सुन रहा है ये मेरी, ना इसे कोई परवाह है। जानता है ये कि कोसेंगे आप इसे पर ये मेरी तरहां नहीं। डर है इसे भी चाहे पर ये कहेगा नहीं;
"हाँ मुझे डर लगता है!"
ये आज अपने दरवाजों को खोलना चाहता है। बताना चाहता है हर शख्स को जो ये पढ़ रहा है कि ये डरपोक नहीं है! कमज़ोर नहीं है! सहा बहुत है इस दिल के मालिक ने भले, पर उफ्फ ना निकाली इसने कभी।
हर बात, हर लम्हात और अनुभव को इसने अपने आप में समेटा है। पर आज करना चाहता है ये ज़ाहिर उन्हें सब कुछ और इसका ज़िम्मा इसने मुझे सौंपा है।
पर ये भी भूल जाता है कि 'कहना ही तो आसान नहीं है!' किसी से दिल की बात बतलाना आसान होता तो क्यूँ मैं डरती?
क्यूँ इतने सालों तक यूँ ही अंदर ही अंदर घुटती?
क्या मैं नहीं चाहती इस बोझ को उतारना?
आसान नहीं है ये। नहीं है आसान सब कुछ बताना । सिर्फ इतना कहना ही मुझे कचोट रहा है कि;
"हाँ मुझे डर लगता है!"
------------
Hello dear friends,
Hope you are liking this story.
What do you think of the cover. Let me know if you have any suggestions for a new cover I'm all ears here.
Do share your thoughts through comments because I'm waiting eagerly for your views. Criticism is always welcome. Feel free to say whatever you feel about this story or if you want to discuss something. The comment section is made for you guys so don't hesitate to use it :)
Your Friend
Kanchan Mehta ☺💗
Bạn đang đọc truyện trên: Truyen247.Pro